woh beete din yaad kar…
राह देखी थी इस दीन की कबसे,
आगे के सपने सजा रखे थे ना जाने कबसे…
बडे उतावले थे यहा से जाने को, ज़िंदगी का अगला पडाव पाने को…
पर ना जाने क्यो.. दील मे आज कुछ और आता है,
वक्त को रोकने को जी चाहता है.
जीन बातो को लेकर रोते थे, आज उन पर हसी आती है…
ना जाने कयों आज उन पलो की याद बहोत आती है…
कहा करता था… बडी मुश्कील से दौ साल सह गया,
पर आज क्यो लगता है कि कुछ पीछे रह गया…
कही-अनकही हजारो बाते रह गई,
ना भूलने वाली कुछ यादे रह गई…
मेरी टांग अब कौन खीचा करेगा,
सीर्फ मेरा सीर खाने कौन मेरा पीछा करेगा…
जहा २००० का हीसाब नही वहा २ रूपीये के लीये कौन लडेगा,
कौन रात भर साथ जग कर पढेगा…
कौन मेरी गाड़ी मुजसे पूछे बीना ले जायेगा,
कौन मेरे नये नये नाम बनायेगा…
मै अब बीना मतलब किस्से ेलडूगा,
बीना topic के किस्से फ़ालतु बात करूगा…
कौन fail होने पर दिलासा दिलायेगा,
कौन गलती से number आने पर गालीयाँ सुनायेगा…
ऐसे दोस्त कहा मीलेंगे, जो खाई मे भी धक्का दे आये,
पर फीर तुम्हे बचाने खुद भी कूद जाये…
मेरे गानो से परेशान कौन होगा,
कभी मुजे किसी लडकी से बात करते देख हैरान कौन होगा…
कौन कहेगा साले तेरे जोक पे हसी नही आई,
कौन पीछे से बूला के कहेगा… “आगे देख भाई…”
movies मै कीस्के साथ देखूगा,
कीस्के साथ boring lectures जेलून्गा…
मेरे फर्जी certificates को रददी केहने की हीम्म्त कौन करेगा,
बीना डरे सच्ची राई देने कि हीम्म्त कौन करेगा…
stage पर अब कीस के साथ जाऊगा,
juniors को फ़ालतु के lectures कैसे सुनाऊगा…
अचानक बीना मतलब के कीसी को भी देख कर पागलो की तरह हसना,
ना जाने ये फीर कब होगा केह दो दोस्तो ये दुबारा से सब होगा?
दोस्तो के लीये professor से कब लड पायेन्गे,
क्या हम फीर ये कर पायेन्गे… रात को २ बजे पोहा खाने कौन जायेगा,
तेज गाड़ी चलाने की शर्त कौन लगायेगा…
कौन मुजे मेरी काबिलीयत पर भरोसा दीलायेगा,
और ज्यादा हवा मे उड्ने पर ज़मीन पे लायेगा…
मेरी खुशी मे सच मे खुश कौन होगा,
मेरे गम मे मुज से ज्यादा दुःखी कौन होगा…
मेरी ये कवीता कौन पढेगा, कौन इसे सच मे समजेगा…
बहोत कुच लिख्नना अभी बाकी है, कुछ साथ शायद बाकी है…
बस एक बात से डर लगता है, दोस्तो,
हम अजनबी ना बन जाये दोस्तो…
जिन्दगी के रन्गो मे दोस्ती के रन्ग फ़िके ना पड जाये कही,
ऐसा ना हो दुसरे रिश्तों की भीड मे दोसती दम तोड जाये…
जिंदगी मे मिलने की फरीयाद करते रेहना,
अगर ना मील सके तो कम से कम याद करते रेहना…
चाहे जीतना हसो आज मुज पर,
मै बूरा नही मानूगा,
इस हसी को अपने दील मे बसा लूगा,
और जब याद आयेगी तुम्हारी,
यही हसी लेकर थोडा मुस्कुरा लूगा…
Courtsey: Nilay Goyal

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